यदि किसी से भी पूछा जाय की बीसवीं शताब्दी की भारत की सबसे बड़ी त्रासदी क्या थी तो निश्चय ही उत्तर होगा भारत विभाजन तो फिर इस त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकने वाले हुतात्मा नाथूराम गोडसे सबसे बड़े महापुरुष क्यूँ नहीं ?? चलिए माना की महापुरुषों की आपस में तुलना नहीं हो सकती है परन्तु पुस्तकों में उसका नाम सम्मान के भी साथ न लिया जाना जिसके कारण आज पंजाब , हरियाणा और हिमांचल भारत का अंग है , यह तो उस महानायक के साथ कृतघ्नता है | सत्ताओं को उनसे इतना भय है की उनके नाम की चर्चा भी नहीं होने देना चाहती है सत्ताएं क्यूँकी पता है की अगर चर्चाएँ प्रारंभ हुईं तो प्रश्न उठेंगे , प्रश्न उठे तो उनके उत्तर खोजे जायेंगे और अगर उत्तर खोजे गए तो कई कथित महापुरुषों और कथित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चेहरों से मुखौटे भी उतर जायेंगे |