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रविवार, 6 मार्च 2011

महात्मा गांधी : अहिंसा का पुजारी या 1919 के हिन्दुओं के नरसंघार का नेतृत्वकर्ता

नकली महात्मा का असली चेहरा


मोहनदास करमचन्द्र गाँधी (कुछ के लिए महात्मा ) , उसे आधिकारिक रूप से तो भारत का राष्ट्रपिता कहा जाता है परन्तु उस व्यक्ति ने भारत की कितनी और किस तरह से सेवा की थी इस सम्बन्ध में लोग चर्चा करने से भी डरते हैं | गांधी के अनुयायी गांधी का असली चेहरा देखना ही नहीं चाहते हैं क्यूँकी वो इतना ज्यादा भयानक है उसे देखने के लिए गांधीवादियों को सहस जुटाना होगा | सभी गांधीवादी , महात्मा गांधी (??) को अहिंसा का पुजारी मानते हैं जिसने कभी भी किसी तरह की हिंसा नहीं की परन्तु वास्तविकता तो यह है की बीसवी सदी के सबसे पहले हिन्दुओं के नरसंघार का नेतृत्व इसी मोहनदास करमचन्द्र गांधी ने किया था |



मैं जिस नरसंघार के बारे में बता रहा हूँ वो 1919 में हुआ था और इस घटना को इतिहास की किताबों (जो की कम्युनिस्टों ने ही लिखी हैं ) खिलाफत आन्दोलन के नाम से पुकारा जाता है और ये भी पढाया जाता है की ये खिलाफत आन्दोलन राष्ट्रीय भावनाओं का उभार था जिसमे देश के हिन्दुओं और मुसलमानों ने कंधे से कन्धा मिलकर भाग लिया था परन्तु इस बारे कुछ नहीं बताया जाता है एक विदेशी शासन और वहां की सत्ता का संघर्ष का संघर्ष भारत के राष्ट्रीय भावनाओं का उभार कैसे हो सकता है ? खिलाफत आन्दोलन एक विशुद्ध सांप्रदायिक इस्लामिक चरमपंथी आन्दोलन था जो की इस भावना से संचालित था की पूरी दुनिया इस्लामिक और गैर इस्लामिक दो तरह के राष्ट्रों में बटी हुई है और पूरी दुनिया के मुस्लिमों ने, तुर्की के खलीफा के पद को समाप्त किये जाने को गैर इस्लामिक देश के इस्लामिक देश पर आक्रमण के रूप  में देखा था | खिलाफत आन्दोलन एक इस्लामक आन्दोलन था जो की मुसलमानों के द्वारा गैर मुस्लिमों के विरुद्ध शुरू किया गया था और इसे भारत में अली बंधुओं ने नेतृत्व प्रदान किया था |

मोहनदास करमचन्द्र गांधी जो की उस समय कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे , उसने इस खिलाफत आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की | ध्यान रहे की खिलाफत आन्दोलन अपने प्रारंभ से ही एक हिंसक आन्दोलन था और इस अहिंसा के कथित पुजारी ने इस हिंसक आन्दोलन को अपना समर्थन दिया (ये वही अहिसा का पुजारी है जिसने चौरी चौरा में कुछ पुलिसकर्मियों के मरे जाने पर अपना आद्नोलन वापस ले लिया था ) और इस गम्न्धी के समर्थन का अर्थ कांग्रेस का समर्थन था | इस खिलाफत आन्दोलन के प्रारंभ से इसका स्वरूप हिन्दुओं के विरुद्ध दंगों का था और गांधी ने उसे अपना नेतृत्व प्रदान करके और अधिक व्यापक और विस्तृत रूप दे दिया |

इस अहिसा के पुजारी की महत्वकांक्षा (या कुछ छिपे हुए अन्य स्वार्थ या कारन) हजारों हजार हिन्दुओं के लाशों पर चढ़ कर राष्ट्र का सबसे बड़ा नेता बनाने की थी और इस लिए इसने मुस्लोमों के द्वारा किये गए इस हिन्दूनरसंघर का भी नेतृत्व कर दिया ताकि मुस्लिम खुश हो जाएँ परन्तु यही नहीं था जो इसने किया जब अली भाइयों ने अफगानिस्तान के अमीर को भारत पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था तब इस कथित अहिंसक महात्मा ने कहा था "यदि कोई बाहरी शक्ती इस्लाम की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए और न्याय दिलाने के लिए आक्रमण करती है तो वो उसे वास्तविक सहायता  न भी दें तो उसके साथ उनकी पूरी सानुभूति रहेगी "(गांधी सम्पूर्ण वांग्मय - १७.५२७- 528)| अब यह तो स्पस्ट ही है की वो आक्रमणकर्ता हिंसक ही होता और इस्लाम की परिपाटी के अनुसार हिन्दुओं का पूरी शक्ती के साथ कत्लेआम भी करता | तो क्या ऐसे आक्रमण  का समर्थन करने वाला व्यक्ती अहिंसक कहला सकता है ??


बात इतने पर भी ख़तम नहीं होती है , जब अंग्रेजों ने पूरी दुनिया में इस आन्दोलन को कुचल दिया और खिलाफत आन्दोलन असफल हो गया तो भारत के मुसलमानों ने क्रोध में आकर पूरी शक्ती से हिन्दुओं की हत्यां करनी शुरू कर दी और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव मालाबार क्षेत्र में देखा गया था | जब वहां पर मुसलमानों द्वरा हिन्दुओं की हत्याएं की जा रही थीं तब इस मोहनदास करमचन्द्र गांधी ने कहा था ".अगर कुछ हिन्दू मुसलमानों के द्वारा मार भी दिए जाते हैं तो क्या फर्क पड़ता है ?? अपने मुसलमान भाइयों के हांथों से मरने पर हिन्दुओं को स्वर्ग मिलेगा ...." |

मुझे लगता है की अब समय आ गया है की हम एक बार पुनः सभी चीजों को देखें और इस बात का निर्णय करें की क्या वास्तव में यह व्यक्ती "अहिंसा का पुजारी " और "देशभक्त" कहलाने के योग्य है या इसको देखभक्त कहना देशभक्तों का अपमान है ??

16 टिप्‍पणियां:

  1. आपका ब्लॉग बहुत पसंद आया. आपने सत्य को मुक्त भाव से कहा. बहुत सुन्दर पोस्ट! हार्दिक शुभ कामनाएं

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  2. कई इस्लामी देश तो बल्कि तुर्की के खलीफा के खिलाफ थे पर हिंदुस्तान के मुसलमानों ने खिलाफा के समर्थन में अंग्रेजों के खिलाफ खिलाफत आन्दोलन शुरू कर दिया था! देश के बटवारे की असली वजह मोती लाल नेहरु का गाँधी को सुझाव और फिर गाँधी का खिलाफत आन्दोलन को दिया गया समर्थन था! मोपला मुस्लिम असल में अरब के समुंदरी लुटेरे थे जो मालाबार में बस गए थे! गाँधी ने उस क्रूर नरसहार को जायज ठहराया था! उस नरसहार पर सावरकर ने मोपला नाम से किताब भी लिखी थी! आज़ादी के बाद देश के गद्दार कोमुनिस्टों ( मुख्यमंत्री नम्बुदरीपाद ) ने तो मोपलाओं को स्वतंतरता सेनानिओं की पेन्सन भी शुरू कर दी थी!

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  3. .

    अंकित जी क्या इन समस्त जानकारियों का कोई प्रमाणित स्रोत भी है? अथवा
    आपका इस विषय पर यह कोई शोध है? अथवा
    आप चित्रों से तथ्यों के अनुमान लगाते हैं? अथवा
    इन समस्त जानकारियों को समकालीन बुजुर्गों से सुना है?

    .........कुछ समय से सोच रहा था कि भारतीय मुद्रा से प्रेम करूँ परन्तु आपने तो उसके प्रति भी विद्वेष भर दिया.
    कोशिश करूँगा अब केवल उसे कमाऊँ देखूँ नहीं. पर इस बीच कोई जाली नोट आ गया तो मुश्किल आ जायेगी.
    क्या करूँ ..... दोस्त.

    .

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  4. प्रतुत जी , यह इन सब का मिश्रण है कुछ व्यक्तियों द्वारा बताये गए संस्मरण कुछ इतिहास की किताबें और कुछ विश्लेषण | वास्तव में तथ्य तो सभी को पता हैं ही परन्तु लोग देखते ही नहीं हैं सत्य को या कुछ लोग देखना नहीं चाहते हैं |

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  5. मैं गाँधी के पुनर्जन्म के रूप बताता हूँ

    १ जैचंद
    २ मान सिंह
    ३- अफज़ल खान (वही दरिंदा जिसे शिवाजी महाराज ने मारा था )
    ४ -मीर ज़फर
    ५ -इलाही बक्श (बहादुर शाह ज़फर जो संभवत: अच्छे मुस्लिम थे उनका समधी जिसने अंग्रेजों का साथ दे उनको पकड़ वाया था )
    ७ - खुद गांधी
    ८ - राहुल गाँधी

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  6. gandhi ne to desh ka bahut ahit kiya. agar ise aajadi ke purv maar diya jaata to desh ke shayad teen tukde nahi hote.

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  7. अंकित जी गांधी वास्तव मेँ एक अहिंसक हत्यारा था । खिलापत आंदोलन से भारत अथवा भारतीय मुसलमानोँ का कोई सम्बन्ध नहीँ था , फिर भी गांधी ने अपने निजी स्वार्थ के लिये उसका समर्थन करके पाकिस्तान का आधार जिन्ना से भी पहले रख दिया था ।

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  8. प्रतुल वशिष्ठ जी गांधी के बारे मेँ प्रमाणित रूप से अधिक जानने के लिए गुरूदत्त का साहित्य विशेष रूप से ' भारत गांधी नेहरू की छाया मेँ ' , वीर नाथूराम गोडसे की पुस्तक ' गांधी वध क्योँ ? , सत्यान्वेषी शिवानन्द की पुस्तक ' गांधी और नेहरू भारत के लिए वरदान या अभिशाप ? इनके अलावा देश - विदेश के लेखकोँ द्वारा लिखी गई और भी शौधात्मक पुस्तकेँ बाजार मेँ उपलब्ध हैँ , पढेँ । यदि गांधी वध क्योँ की संक्षिप्त जानकारी लेनी हो तो www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com पर तीन भागोँ मेँ लिखा गया ' अखण्ड भारत के स्वप्नद्रष्टा वीर नाथूराम गोडसे ' लेख पढा जा सकता हैँ ।

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  9. in bato ko kabhi adwani bhari sabha me bole to accha rahega
    ek taraf to kahte ho ki godse ka sangh se koi wasta nahi tha aur ek taraf ye hal hai

    achha doglapan hai

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  10. अंकित जी का यह लेख गाँधी परिवार के सन्दर्भ मैं शुरू किये गये एक विशेष ब्लॉग मैं भी प्रकाशित किया गया है. कृपया देखें
    http://gandhi4indian.blogspot.com/

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  11. vishwajeet ji main apki baaton se poorntah sahmat hun godse ji ka tabse samarthan kar raha hun jabse maine bharat ki swtantrata ke mayne samjhe hai aur kaash ye kaam godse ji ne pehle kar diya hota to shayad hume apne shri bhagat singh ji, sukhdev ji,rajguru ji aur anya sacche swatantrata senaniyon se vanchit na hona padta godse ji ko mera sat sat naman

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  12. hi, ankit ji, aap ke lekh ko padh kar pata nahi kyon aisa lagata hai aap kahi na kahi purwagrah se grashit ho kar likhate hain........ Aap ne ne likha hai fact sabhi ke liye ek hota hai aur bayakhya aap apne according karte hain. Bilkul sahi kaha aap ne lekin aap ne kabhi is bat ka ehsas kiya hai ki jab ham kisi topic par discuss karte hain or bayakhya karte hain to hamare upar apne mahoul ka bhi asar dikhata hai. Bas mujhe kuch isa hi aap ke sath bhi dikhta hai. Aap ek ise insan ki bat kar rahe hain jo hamare aur aapke pasand par hi Rastapita bane... Inho ne desh ko freedom dilane ke liye sambhaw hai kuch galt statement bhi diye honge lekin jab ham unka ablokan karte hain to us samay ki paristhiti ko kyon bhul jate hain. Sif kuch unknown tippni ko aadhar bana kar uspar ek statement dena aasan hai lekin research aap ko ye batati hai ki jab bhi aap report banaye reference jarur use kare. Lekin afsos ki aap ne aesa nahi kiya hai.........without reference aap ki tippni bemani hai aur hum use ek research scholar ki bat to katai nahi kah sakte. So, I request you please make some correction regarding the reference and befor blamming some one please justify the things regarding the situation also. Main koi gandhi badi aur non gandhi badi nahi hoon lekin as a research sholar mai ne jo kami aapke lekhan me dekha use bataya hai. Aap ne ek kahawat jarur suni hogi... yadi ham ek aungli kisi pe uthate hai to char aungli khud pe bhi uthati hai..... SO, Please remember this without referece it can be your thought but no one can say that you are a scholar.......
    with love...

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  13. Aapko thori research karne ki jarurat hai. Kyu ki ek sentence ke matlab alag bhi ho sakta. Ye ise baat Per nerbher karge ke aap kis sandharv me bol rahe hai. Aur ha galti sabhi se hoti hai, Per jindgi mai ek samaya aisa bhi aata jab, aapki jindgi badal jaati hai. Runnitti halat ke hisaab se bante hai, Per maksad nahi badlta.

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