योग गुरु बाबा रामदेव और उनके भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के विरुद्ध मीडिया का दुष्प्रचार चल रहा है और निश्चित रूप से यह सब मूल विषय से ध्यान हटाने के लिए , इस आन्दोलन को कमजोर करने के लिए उन व्यक्तियों के इशारे पर हो रहा है जो स्वयं ही भ्रष्ट हैं और ये आरोप कितने तथ्यहीन हैं आइये ये देख लेते हैं |
बाबा रामदेव को उतना जन समर्थन नहीं मिला जितना की अन्ना हजारे को
अन्ना हजारे ने अपना अनशन जंतर मंतर पर किया था | यह स्थान एक सड़क का छोटा सा हिस्सा है जो की धरना प्रदर्शनों के लिए आरक्षित है , अन्ना हजारे का धरना स्थल केवल ५ हजार लोगों से भार गया था जबकी स्वामी बाबा रामदेव ने तो अपने सत्याग्रह का प्रारंभ ही ४० जहर लोगों के साथ किया था |इसके अतिरिक्त अन्ना हजारे का अनशन शुरू हेने से कुछ दिन पहले से ही मीडिया ने उसके पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया था और इस प्रकार का प्रचार किया था जिससे अन्ना का समर्थन करना फैशन बन गया था और जंतर-मंतर पर उपस्थित लोगों में से अधिकांश ऐसे ही थे जो की शायद सोशल नेट्वर्किंग के लिए फोटो खिचवाने गए थे उनको ना तो लोकपाल या जनलोकपाल के बारे में पता था और ना ही इसके प्रभाव के बारे में और दिल्ली के ही लोग थे जो एक दिन की पिकनिक पर आये थे जबकी बाबा रामदेव के सत्याग्रह में भारत के प्रत्येक स्थान से प्रत्येक आयु , प्रत्येक आर्थिक और सामाजिक वर्ग के लोग (दिल्ली के लोगों की भी संख्या काम नहीं थी) आये हुए थे और उन सबको पता था की सत्याग्रह की मांगें क्या हैं और उनका क्या प्रभाव होगा और उसमे से अधिकांश आमरण अनशन के लिए आये थे ना की फोटो इकट्ठी करने के लिए तो किसका समर्थन ज्यादा था इसका निर्णय आप ही करिए |
बाबा रामदेव के पांच सितारा सुविधाएं
एक और दुष्प्रचार , बाबा स्वामी रामदेव जी के सत्याग्रह में १० लाख लोगों के आने का अनुमान था और उसमे से अधिकांश लोग आमरण अनशन के लिए आ रहे थे ,और भारत के सुदोर स्थानों से आ रहे थे जो की अन्न को त्याग कर केवल जल पीकर ही रामलीला मैदान में बैठने वाले थे | उन सत्याग्रहियों की सुविधा के लिए टेंट लगवाया गया था और पीने के पानी की व्यवस्था की गयी थी |





