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शनिवार, 9 जुलाई 2011

पहले सोमनाथ फिर विश्वनाथ और अब पद्मनाभ

एक और हिन्दू मंदिर को लूटने के प्रयास


भारतीय संस्कृति में धर्म का एक विशेष महत्त्व रहा है और इसी लिए दान का भी महत्त्व रहा है |हमारे मंदिरों की सम्रद्धि सदैव से लुटेरों के आक्रमण का केंद्र रही है पहले मुस्लिम आक्रान्ताओं के सोमनाथ मंदिर को कई बार लुटा और अब इस्लामिक और ईसाई गटबंधन केरल के पद्मनाभ मंदिर को लूट रहा है और देश के हिन्दू ये देख ही नहीं पा रहे हैं की उनकी संपत्ति को छिना जा रहा है जो की बाद में इस्लाम और ईसाइयत के प्रचार में लगाई जाएगी | हिन्दू मंदिरों की संपत्ति से जेहादी शस्त्र खरीदेंगे और मिशनरी इसी धन की सहायता से धर्मान्तरण कार्य करेंगे |

कुछ लोग ये तर्क दे रहे हैं की यह धन देश का है और इस लिए देश के कल्याण और विकास में खर्च किया जाना चाहए परन्तु उन लोगों की कभी भी यह तर्क मस्जिदों और मजारों के धन के देने की हिम्मत नहीं होती है | कभी यह नहीं कहा जाता है हज यात्रियों पर जो धन खर्च किया जाता है उसे देश के विकास में लगाया जाय क्यों की पता है की ऐसा करते ही फतवे भी निकल सकते है
और तलवारें भी (जिस तरह से एक ईसाई शिक्षक का हाथ काटा गया) परन्तु हिन्दू मंदिरों की सम्रद्धि पर इन लोगों की गिद्ध दृष्टी लग गयी है |

सबसे पहली बात तो यह की ये जो धन मिला है ये भगवन पद्मनाभ का है तो इसका राष्ट्रीयकारण क्यों किया जाना चाहिए वह भी उस समय में जब की सभी सरकारी चीजों का निजीकरण किया जा रहा है ?? यह धन भगवान पद्मनाभ का धन है तो इसे भगवान पद्मनाभ के भक्तों के कल्याण में लगाया जाना चाहिए ना की भगवान के मंदिरों के लुटेरों के कल्याण में | इसके अतिरिक्त जिन लोगों ने यह धन दान में दिया था वो हिन्दू थे और उन्होंने यह धन मंदिर को दिया था ना की किसी सरकार को इस लिए इस धन पर मंदिर का ही अधिकार है | इसके अतिरिक्त कुछ लोग इस धन की तुलना विप्रो या किसी कोरियाई कंपनी की संपत्ति से कर रहे हैं तो विप्रो की संपत्ति का निवेश कैसे करना है ये विप्रो निर्धारित करती है और कोरियाई कंपनी यह निर्धारित करती है की उस संपत्ति का निर्धारण कैसे करना है तो पद्मनाभ मंदिर के ट्रस्ट को मिलाना चाहिए |

इसके अतिरिक्त कुछ लोग कह रहे हिं की इस धन को गरीबों के कल्याण के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए | जब लोग कहते हैं गरीबों के कल्याण के लिए तो उनका मतलब मुस्लिम होता है | केरल के तो के मंत्री ने इस धन को "गरीबों और अल्पसंख्यकों " पर खर्च करने की मांग भी कर दी है | मुस्लिमों की गरीबी उनके स्वयं के द्वारा उत्पन्न की गयी परिथितियों की दें होती है , मुस्लिम औरतें बच्चे पैदा करने की मशीन से अधिक कुछ नहीं होती हैं और मुस्लिम पुरुष उनको जेहादी और दंगाई बनाते हैं | मुस्लिम महिलाएं आतंक के लिए कच्चे माल का उत्पादन करती हैं और मुस्लिम पुरुष उस कच्चे माल को शाश्त्र में परिवर्तित करते हैं | यही उनकी नियति है क्यूँकी यही उनका धर्म है |मुस्लिमों के तो देश की आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकी है क्योंकी इस बुरी स्थिति का कारण उनके धर्म में है | उत्पादन में मुस्लिमों का सहयोग नगण्य ही होता है इसलिए उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नई होती है और जो कुछ धन होता भी है तो केरल के मुस्लिम वो धन लव जेहाद जैसे कार्यक्रमों पर खर्च करते हैं और हिन्दू शर्मनिरपेक्ष यह मांग कर रहे हैं की स्वामी पद्मनाभ का धन "लव जेहादियों" को दे दिया जाय ताकि वो और तेजी से लव जेहाद कर सकें ??

अब प्रश्न यह है की इस धन का किया क्या जाय ?? यह धन पद्मनाभ मंदिर का है तो इसे मंदिर के अन्दर ही रहना चाहिए | वहां पर एक संग्रहालय बनाया जा सकता है जहाँ पर इस सब वस्तुओं को प्रदर्शन के लिए रखा जा सकता है | ये सभी वस्तुएं एतिहासिक महत्त्व की हैं तो इनके प्रदर्शन मात्र से मंदिर प्रशासन को आय हो सकती है और उसके बाद इस आय का उपयोग लव जेहाद पीड़ितों के पुनर्वास एवक उनको न्याय एवं सुरक्षा दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया में किया जाना चाहिए |

14 टिप्‍पणियां:

  1. सोमनाथ के भगवान महमूद गजनवी से अपने मंदिर की रक्षा नहीं सके .......
    by Sudhir Jai on Wednesday, July 6, 2011 at 8:19am



    भारत की समृद्धि और वैभव के चर्चे सुन कर बाहर से बार-बार आतंकियों के हमले हुए हैं। खण्ड़-खण्ड़ में बिखरे राज्यों और उनके, एक-दो को छोड़, शासकों को बहुतेरी बार जलील होना पड़ता रहा है। पर उनके गरूर और अहम के कारण कभी भी पूरे देश में एका नहीं हो पाया और इसी का फायदा बार-बार लुटेरे उठाते रहे। कैसे-कैसे नहीं लूटा उन्होंने, यहीं के मवेशियों पर यहीं के लोगों के सहारे जितना भी जैसा भी जो भी बन पाया उठा कर ले गये। और हम आशा करते रहे कि भगवान खुद आ कर हमारी रक्षा करेगा।



    11वी शताब्दी में ( 1000 ई से 1027 ई तक ) महमूद गजनवी ने भारत पर 17 आक्रमण किये और हर बार वो सफल रहा सन 1025 में 17 वे आकर्मण में वह गुजरात के सोमनाथ मंदिर यहां आ घुसा उसके हमले की खबर पा आस-पड़ोस के राजाओं मंदिर के पुजारियों को सैन्य सहायता की पेशकश की थी। पर मंदिर के कर्ता-धर्ताओं ने उनकी पेशकश यह कह कर नामंजूर कर दी थी कि भगवान खुद अपनी रक्षा में सक्षम हैं।और वे मंदिर की दीवारों पर बैठ कर तमासा देखते रहे और गजनवी ने सम्पूर्ण मंदिर को धवस्त कर दिया

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  2. कम से कम इस लेख को पढ़ तो लिया होता , केवल शीर्षक देख पर अपना पूरा नोट पेस्ट कर दिया , इस लेख में यह बताया गया है की स्वामी पद्मनाभ मंदिर की संपत्ति मंदिर में ही रहनी चाहिए राष्ट्रहित में

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  3. सरकार प्राकृतिक संसाधनों की लुट के बाद दलाली खाने निकल पड़ी..
    अब उसकी हवस इन मंदिरों के धन को स्विस भेज कर मिटेगी...सोचिये वो परिवार कितना महान है जिसने इतने धन को वर्षों से छुवा तक नहीं अब सरकारी गिद्ध इस पर आँखे लगाये बैठे हैं..
    अल्पसंख्यक तुस्टीकरण की हड्डिय तो १०% डाली जाएँगी बाकि सब मैडम इटली भेजने की तयारी है..
    अगर अब भी हिन्दू कायर बना रह तो यही परिणिति होनी है..

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  4. ये कहना गलत है कि इस्लामिक और ईसाई गटबंधन केरल के पद्मनाभ मंदिर को लूट रहा है, ताले सुप्रिम कोर्ट के आदेश पर खोले गये, नहीं तो किसी को क्या पड़ी थी,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  5. परन्तु अब तो उस धन की लूट का प्रयास हो रहा है आप समाचारों की और मीडिया की भाषा नही सुन रहे हैं क्या??

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  6. ankit ji! bahut sateek praasangik aur prashansniy lekh likha hai aapne.
    plz check here for more detail on the same topic.

    http://tripathivasudev.jagranjunction.com/2011/07/08/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8/

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  7. THIS IS TRUE THAT MADAM SONIA IS A ISAI. EARLIER MUSLIM HAS LOOTED THE TEMPLES OF HINDUS. NOW ISAI'S AND MUSLIMS BOTH ARE TRYING TO DO THE SAME. IN THE PAST ALSO SOME HINDUS HELPED THE ATTACKERS AND NOW ALSO SOME SUCH GADDAARS ARE GOING TO HELP.
    THE INDIANS WHO SUPOORT SUCH ACT AND SAY THAT THIS MONEY IS TO BE NATIONALISE, KINDLY ASK THE ANCESTORS OF THOSE LUTERA'S TO RETURN THIS MONEY BACK TO INDIA.
    PRESENT LUTERAS, PLEASE REMEMBERS WHERE IS THE LUTERA OF SOMNATH AND OTHER TEMPLE AND WHERE IS THAT MONEY. WHAT IS THE CONDITION OF THAT CONTRY WHERE THAT WEALTH WAS TAKEN. tHEY NOW DYING WITH HUNGER AND FIGHTING FOR EXISTENCE. HINDUS ARE NOT COWARD. THEY NOW NOTHING IS PERMANENT. EVERY HINDU KNOW THAT THE SOMNATH AND OTHER TEMPLES ARE MUCH WEALTHY THAN EARLIER. MANY LUTERA'S BEGGARS HAVE LOOTED THE WEALTH OF THIS NATION BUT STILL WE HAVE MORE THAN THAT.

    A LADY WHO HAS HANDS IN THE OUSTING HER ELDER SISTER IN LAW (MENKA GANGHI) FROM HER HOUSE, WHO HAS HAND IN THE KILLING OF HER BROTHER IN LAW AND MOTHER IN LAW. NEEDLE OF SUSPENSE WAS TOWARDS HER IN KILLING OF HER HUSBAND. HER BEHAVIOUR TOWARDS THE KILLER OF HER HUSBAND. BUT THE PEOPLE DO NOT UNDERSTAND HER GAME PLAN ARE BEING AND MISLEADING THE PEOPLE OF THIS COUNTRY.
    KINDY UNDERSTAND HER MODUS OPERANDI AND FIGHT HER BACK TO SAVE THE NATION AND THE NATIONAL WEALTH FROM BEING STOLLEN BY THIS LADY AND GADDARS.

    SATINDER KUMAR RANA

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  8. the wealth of these temples belong to the gods of those temples and if the govt. succeedes in taking the money of this one temple then be sure that this cheat govt. will attack other temples and take all that belongs to the temples and later on no one will be willing to donate money to the temples and then think how will you manage these temples?secondly,the huge amount lying in the swiss and other foreign banks is not being claimed because it belongs to these members of the parliament,who,earlier had nothing ,and after becoming the members of the parliament make crores and crores of rupees and that is not at all used in the development of the country,then why should the money belonging to the gods of the temples is being claimed in the name of the country?even if the hon'ble supreme court orders as such then it is disgusting and should be protested.

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  9. अंकित भाई बेहद सार्थक आलेख...

    जाते जाते मेरे दिमाग की एक और उलझन को सुलझाने का कष्ट करें|

    बाबा रामदेव के ट्रस्ट की संपत्ति है करीब ११०० करोड़ रुपये, जिसकी सरकार को बार बार जांच करनी है|
    श्री श्री रविशंकर जी महाराज के आर्ट ऑफ लिविंग की संपत्ति है करीब २५०० करोड़ रुपये| बाबा रामदेव का समर्थन करने के कारण इनका भी नंबर लगने वाला है|
    माता अमृतान्दमयी की संपत्ति है करीब ६००० करोड़ रुपये| इनकी भी बारी लग रही है|
    पुट्टपर्थी के सत्य साईं बाबा की संपत्ति को लेकर अभी कुछ दिन पहले बवाला मच चूका है|

    वही दूसरी ओर
    Brother Dinakaran जो कि एक Self Styled Christian Evangelist हैं (कभी नाम सुना है?) की संपत्ति ५००० करोड़ से ज्यादा है|
    Bishop K.P.Yohannan जिन्होंने २० वर्षों में एक Christian Sector बना दिया, की संपत्ति १७००० करोड़ है|
    Brother Thanku (Kottayam, Kerela) एक और Christian Evangelist, की संपत्ति ६००० हज़ार करोड़ से अधिक है|


    कोई पूछे मायनों से या उसकी चमचागिरी करते हुए उसके तलवे चाटने वाले दिग्विजय से कि इन तीन पादरियों (जिनका नाम शायद कुछ सौ लोग ही जानते होंगे) के पास इतनी संपत्ति कहाँ से आई? क्या कभी इनकी भी जांच होगी?

    पद्द्नाभ मंदिर की संपत्ति तो दिख रही, किन्तु चर्च में जो धन पड़ा है, वो क्यों नहीं दिखता?

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  10. सोचने वाली बात है, देखिये क्या होता है ?


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    शब्द-शिखर : 250 पोस्ट, 200 फालोवर्स

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  11. मंदिर का पैसा है ! लोगों की आस्था का प्रतीक है , इस पर सरकार को आँख नहीं गड़ानी चाहिए ! राष्ट्र हित के नाम पर सरकार पैसे लेकर काले धन में ही बदल देगी . मंदिरों को लूट रही है और देश को भी लूट रही है.

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आप जैसे चाहें विचार रख सकते हैं बस गालियाँ नहीं शालीनता से